रोजा रखने की दुआ, रोजा खोलने की दुआ

Apr 13 2021

रोजा रखने की दुआ, रोजा खोलने की दुआ

रमजान का महीना सभी मुस्लिमों समाज के लोगों के लिए बहुत पाक महीना माना जाता है। कहा
जाता है इस महीने में सभी रोजेदारों के लिए जन्नत के दरवाज़े खुल जाते है। रमजान को नेकी और
इबादत का महीना इसलिए कहा जाता हैं क्योंकि इस पूरे महीने रोजा रखना,दुआएं करना, दान
करना सबाव का काम माना जाता है। यूँ तो रमजान में तरावीह की नमाज़ और तरावीह की दुआ भी पढ़ी जाती है मगर अभी चलिए जानते हैं रोजा रखने की दुआ और नियत के बारे में पूरी जानकारी।

H2 - रोजा रखने की नीयत - Roza Rakhne ki Niyat

साधारण शब्दों में नीयत का मतलब होता है इरादा करना। इस्लाम में नीयत की बहुत अहमियत है
क्योंकि नीयत के बिना न नमाज़ कबूल होती है और न ही रोजा। हमेशा नियत करना चाहिए। अगले दिन का रोजा रखने से पहले आपको रात में नीयत कर लेनी चाहिए कि मैं कल रोजा रखूंगी/रखूँगा। अगर रात में नीयत करना भूल गए तो सहरी के वक्त भी रोजे की नीयत कर सकते हैं, यह गलत नहीं होगा। लेकिन अगर आपने रोजा रखने से पहले इरादा नहीं किया तो रोजा रखने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि बिना नीयत के दिन भर भूखे-प्यासे रहने से भी रोजा कबूल नहीं होता। सभी रोजेदारों को नियत की अहमियत पता होनी चाहिए।
H2 - रोजा रखने की दुआ - Roza Rakhne ki Dua

रोजेदारों को रोजे की नियत के साथ-साथ रोजे की दुआ के बारे में व्ही मालुम होना चाहिए।
इस्लामिक मान्यतों के अनुसार किसी भी काम को करने से पहले दुआ पढ़ी जाती है। ठीक वैसे ही
रोजे रखने की दुआ भी होती है। रमजान के महीने में रोजा रखने से पहले भी दुआ (Roza Rakhne ki Dua) पढ़ना जरूरी होता है। ऐसा माना जाता है कि बिना दुआ पढ़े रोजा कबूल नहीं होता। सहरी
खाने के बाद यानी सुबह की नमाज से कम से कम 10 मिनट पहले यह दुआ (Ramzan ki Dua) पढ़ लेनी चाहिए। यह भी एक सबाब का काम है। कोई भी दुआ तब तक क़ुबूल नहीं होती जब तक उसे सही ढंग से न पढ़ा जाएं। आप रोजे की दुआ नीचे पढ़ सकते हैं।

हिंदी में रोजा रखने की दुआ
व बि सोमि गदिन नवई तु मिन शहरि रमजान

इंग्लिश में रोजा रखने की दुआ
Wa bisawmi ghadin nawaitu min shahri ramadan

अरबी में रोजा रखने की दुआ
وَبِصَوْمِ غَدٍ نَّوَيْتُ مِنْ شَهْرِ رَمَضَانَ.

हिंदी में दुआ का मतलब
मैंने रमजान के कल के रोजे की नियत की।

रोजा खोलने की नीयत - Roza Kholne ki Niyat

रोजा रखने के साथ-साथ रोजा खोलने की दुआ और नियत भी अलग होती है। आप चाहें तो दोपहर
में नीयत कर सकते हैं। अगर दोपहर में नीयत कर ली जाए कि इफ्तार में मेरा रोजा पूरा हो जाएगा
तो इसका मतलब यह बिलकुल नहीं होता कि आप उसी वक्त से खाना शुरू कर दें। ऐसा करने से
आपका रोजा टूट जाएगा और रोजे का कोई सवाब भी नहीं मिलेगा। ऐसे में समय पर ही इफ्तारी
करनी चाहिए। कुछ लोगों का मानना है कि हर दिन रोजा रखने व खोलने की नीयत जरूरी नहीं है।

रोजा खोलने की दुआ - Roza Kholne ki Dua

जैसे रोजा रखने की दुआ होती है वैसे ही रोजा खोलने की भी दुआ अलग होती है।

हिंदी में रोजा खोलने की दुआ
अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमतु, व-बिका आमन्तु, व-अलयका तवक्कालतू, व- अला रिज़क़िका अफतरतू

इंग्लिश में रोजा खोलने की दुआ
Allahumma Inni Laka Sumtu wa Bika Aamantu wa ‘Alayka Tawakkaltu wa ‘Ala Rizq-Ika Aftarthu.

अरबी में रोजा खोलने की दुआ
اَللّٰهُمَّ اِنَّی لَکَ صُمْتُ وَبِکَ اٰمَنْتُ وَعَلَيْکَ تَوَکَّلْتُ وَعَلٰی رِزْقِکَ اَفْطَرْتُ.

दुआ का हिन्दी में मतलब
ऐ अल्लाह, मैंने तेरी ही रज़ा के लिए रोजा रखा और तेरी ही रिज़्क पर इफ्तार किया