ये हैं JNU की पूर्व छात्रनेता शेहला रशीद, विवादों से है रिश्ता, इस बार पिता ने कहा 'एंटी नेशनल'

Dec 01 2020

ये हैं JNU की पूर्व छात्रनेता शेहला रशीद, विवादों से है रिश्ता, इस बार पिता ने कहा 'एंटी नेशनल'

अक्सर अपने विवादित बयानों से चर्चा में रहने वाली जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला रशीद एक बार फिर से सुर्ख‍ियों में हैं. इस बार उनके पिता अब्दुल रशीद शोरा ने ही उन पर एंटी नेशनल होने और जान का खतरा होने जैसे आरोप लगाए हैं. जानिए कौन हैं शेहला रशीद और क्या है पूरा मामला.

बता दें कि शेहला रशीद के पिता ने जम्मू-कश्मीर के डीजीपी को पत्र लिखकर अपनी बेटी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. अब्दुल रशीद ने पत्र में दावा करते हुए लिखा है कि उन्हें अपनी बेटी से जान का खतरा है. उन्होंने बेटी पर एंटीनेशनल होने का भी आरोप लगाया है.

32 साल की शेहला रशीद मानवाधिकार सामाजिक कार्यकर्ता, जेएनयू की पूर्व छात्रनेता और कश्मीरी नेता के तौर पर काफी ख्याति पा चुकी हैं. शेहला का जन्म श्रीनगर के हब्बा कदल मोहल्ले में हुआ था. ये यहां का एक पुराना इलाका माना जाता है. उनके पिता अब्दुल रशीद और मां के बीच संबंध अच्छे नहीं चल रहे थे. शेहला ने खुद अपने एक बयान में कहा है कि वो अपनी बहन और मां के साथ पिता पर घरेलू हिंसा जैसा मामला दर्ज कराने जा रही थीं.
फरवरी 2016 में जेएनयू कैंपस में हुई कथित देशविरोधी नारेबाजी मामले में पहली बार शेहला रशीद का नाम मीडिया की सुर्खियों में आया था. इसके बाद लगातार वो ट‍्विटर पर ट्रोलर्स के निशाने पर भी रहीं. ये ही नहीं उन पर अब तक विवादित ट्वीट्स को लेकर कई मामले भी दर्ज हो चुके हैं. जेएनयू से पीएचडी कर रही शेहला के बारे में पहले कहा जा रहा था कि वो राष्ट्रीय जनता दल या कांग्रेस ज्वाइन कर सकती हैं. लेकिन 2019 में उन्होंने पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल द्वारा स्थापित जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट पार्टी ज्वाइन की.

शेहला ने श्रीनगर की नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. NIT से ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने श्रीनगर में ही HCL Technologies में काम किया. उन्होंने कश्मीर में महिला हिंसा व जुवेनाइल जस्टिस के मामले भी उठाए.

शेहला ने फिर वहां से आकर जेएनयू में एडमिशन ले लिया. यहां से एमए सोशियॉलजी करने के बाद लॉ एंड गवर्नेंस में एमफिल किया. वर्तमान में वो जेएनयू में शोध छात्रा भी हैं. मार्च 2016 में इंडिया टुडे कॉनक्लेव में बोलते हुए शेहला ने कहा था कि जेएनयू में आने से पहले उनके मन में भारत को लेकर काफी हिंसक छवि थी लेकिन जेएनयू ने उन्हें एक प्रजातांत्रिक मंच दिया.

इसके बाद 2015-16 में शेहला जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) की उपाध्यक्ष भी रहीं. वो ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की सदस्य भी थीं. छात्रनेता के तौर पर उन्होंने छात्र हित में कई आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. उन्हें अपने निर्भीक बयानों और प्रखर वक्ता के तौर पर कैंपस में खूब पहचान मिली.
पहले भी रहे विवाद

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (AMUSU) ने फरवरी 2017 में पैगंबर मोहम्मद साहब पर एक फेसबुक पोस्ट लिखने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. शेहला पर आरोप था कि उन्होंने अपने पोस्ट में पैगंबर के लिए काफी आपत्तिजनक बात लिखी थी. अक्टूबर 2018 में उन्होंने एक आइरिश गायिका के धर्म परिवर्तन को लेकर ट्वीट किया था. जिसे लेकर काफी ट्रोल हुई थीं और अपना ट्विटर अकाउंट भी बंद कर दिया था जो बाद में खुला.

फरवरी 2019 में देहरादून पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था. पुलिस ने उनके एक ट्वीट को आधार बनाया था. जिसमें उन्होंने देहरादून के हॉस्टल में 15-20 कश्मीरी लड़कियों को बंधक बनाने का आरोप लगाया था. फिर 2019 में अपने ट्वीट को लेकर विवादों में आईं जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय सेना कश्मीरियों को प्रताड़ित कर रही है. ये बयान उन्होंने धारा 370 हटाए जाने पर कश्मीर में हो रही गतिविधियों पर दिया था. इस पर भारतीय सेना ने जवाब देते हुए इसे गलत खबर कहा था. यही नहीं सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी.

फिलहाल उनके घर की 'जंग' एक बार फिर राष्ट्रीय मीडिया का हिस्सा बन चुकी है. उनके पिता ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके जवाब में उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा है कि यह 'आधारहीन और घृणित' है. शेहला ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि परिवार में ऐसा नहीं होता, जैसा मेरे पिता ने किया है. उन्होंने मेरे साथ-साथ मेरी मां और बहन पर भी बेबुनियाद आरोप लगाए हैं.