शक्तिपीठ कुंजापुरी: यहां देवी की मूर्ति नहीं, स्थापित है शिलारूप पिण्डी

Mar 27 2017

शक्तिपीठ कुंजापुरी: यहां देवी की मूर्ति नहीं, स्थापित है शिलारूप पिण्डी

उत्तराखंड के टिहरी जिले में स्थित कुंजापुरी मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है। मां कुंजापुरी देवी मंदिर गढ़वाल के सुंदर रमणीक स्थलों में से भी एक है। पर्वत की चोटी पर स्थित मन्दिर से इसके चारों ओर प्रकृति की सुंदर छटा नजर आती है।

पुजारी होशियार सिंह भंडारी ने बताया कि स्कदंपुराण, केदारखंड के अनुसार जब राजा प्रजापति दक्ष के हवन कुण्ड में देवी सती प्राण त्याग देती हैं। इसके बाद शोकमग्न भगवान शिव देवी सती के जलते हुए शरीर को उठाकर विचरण करने लगते हैं। इस स्थान पर देवी का वक्षभाग (कुंज) गिरा था, इसीलिए इसे कुंजापुरी के नाम से जाना गया। मंदिर के गर्भगृह में देवी की कोई मूर्ति नहीं हैं। अन्दर एक शिलारूप पिण्डी स्थापित है।

कहा जाता है कि इसी स्थान पर देवी का वक्षभाग गिरा था। मंदिर में निरंतर अखंड ज्योति जलती रहती है। गढ़वाल के सभी मंदिर में पुजारी सदैव एक ब्राह्मण होते हैं, लेकिन इस मंदिर में भंडारी जाति के राजपूत पुजारी हैं। इन्हें बहुगुणा जाति के ब्राह्मणों द्वारा शिक्षा दी जाती है। मन्दिर वर्ष भर खुला रहता है, परन्तु चैत्र और शारदीय नवरात्र पर यहां विशेष पूजा होती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर नवरात्र में यहां पहुंचते हैं।

कुंजापुरी मंदिर समुद्रतल से लगभग 1605 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ऋषिकेश से टिहरी राजमार्ग पर करीब 25 किमी की दूरी पर हिन्डोलाखाल बाजार है, यहां से मन्दिर तक पहुंचने के लिए सड़क तथा पैदलमार्ग दोनों हैं।